नगरासू गुरुद्वारा निहंग घटना पर भाकपा माले ने उठाए कई सवाल, कांग्रेस ने भी की निष्पक्ष जांच की मांग
कुछ निहंगों ने 20 जून को नगरासू के गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ विवाद के बाद ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर लिया था
देहरादून/गैरसैंण: रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू में गुरुद्वारे में 4 दिन तक ऊपरी मंजिल पर कब्जा करने वाले निहंग मंगलवार को चले गए, लेकिन इस घटना पर कई सवाल भी खड़े हो गए. भाकपा (माले) उत्तराखंड के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने बयान जारी कर सवाल किया है कि- पंजाब और उत्तराखंड के लोगों को यह भी विचार करना चाहिए कि कहीं यह पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ध्रुवीकरण का कोई षड्यंत्र तो नहीं है, जिसका मोहरा दोनों प्रदेश के लोगों को बनाया जा रहा हो? वहीं कांग्रेस ने कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
नगरासू की घटना पर भाकपा (माले) के सवाल: भाकपा (माले) उत्तराखंड के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने एक प्रेस बयान जारी किया. उन्होंने लिखा है-
16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय युवाओं के बीच हुई झड़प के मामले में सिख पक्ष की क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली गयी है. इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल एक स्थानीय युवा को एयर लिफ्ट करके इलाज के लिए देहरादून भेजना पड़ा और अन्य के भी गंभीर चोटें आई. इसके बावजूद भी क्रॉस एफआईआर दर्ज करवाना दूसरे पक्ष का कानूनी अधिकार है. यह तो जांच के बाद न्यायालय तय करेगा कि कौन पीड़ित था और किसने हमला किया.
इंद्रेश मैखुरी ने क्रॉस एफआईआर पर जताया आश्चर्य: लेकिन उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड पुलिस द्वारा कर्णप्रयाग में स्थानीय युवाओं द्वारा दर्ज एफआईआर और सिख पक्ष द्वारा दर्ज क्रॉस एफआईआर की जांच हरिद्वार स्थानांतरित किये जाने पर गंभीर सवाल है. आखिर किस आधार पर उत्तराखंड की सरकार और पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इन दोनों ही एफआईआर की निष्पक्ष जांच कर्णप्रयाग पुलिस या चमोली पुलिस द्वारा संभव नहीं है और हरिद्वार पुलिस ही इनकी निष्पक्ष जांच के सर्वथा योग्य है? जिले से बाहर जांच स्थानांतरित करनी ही थी तो बगल में रुद्रप्रयाग जिला था, उसके बाद पौड़ी और टिहरी जिला था तो फिर हरिद्वार ही क्यों?
इंद्रेश मैखुरी ने सवाल किया कि, क्या पुलिस अधिकारियों को भी उनके पद के हिसाब से नहीं बल्कि उनके धर्म और वे किस मूल के हैं, इस नज़रिए से देखा जा रहा है? क्या सामान्य समय में भी उत्तराखंड में हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को उनके रैंक और पद के अनुसार नहीं, उनके धर्म और मूल के अनुसार देखा जाना चाहिए? यह एक बहुत खराब नज़ीर उत्तराखंड सरकार और पुलिस स्थापित कर रही है.
नगरासू गुरुद्वारा मामले को कर्णप्रयाग की घटना से जोड़ने पर मैखुरी नाखुश: मैखुरी ने कहा कि, एक प्रश्न यह भी है कि नगरासू में गुरुद्वारे पर कब्जा करने वालों को कर्णप्रयाग की हिंसा से किस आधार पर जोड़ा जा रहा है? क्या सिर्फ उनके कथन के आधार पर? क्या इसको लेकर कोई जांच हुई? नगरासू के गुरुद्वारे के प्रबंधक तो कह रहे हैं कि कब्जा करने वालों का गुरुद्वारे के लोगों से झगड़ा हुआ, उसके बाद उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया. इस बात से तो नहीं लगता कि उनके गुरुद्वारे पर कब्जा करने का संबंध कर्णप्रयाग की घटना से है! कहीं ऐसा तो नहीं कि कर्णप्रयाग की घटना को अपनी अतिवादी कार्यवाही के बचाव के कवच के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा हो?
कोई और धर्मावलंबी इस तरह से किसी धर्मस्थल पर कब्जा कर लेता तो क्या उत्तराखंड पुलिस उसके साथ इतने ही उदारतापूर्वक पेश आती?
भाकपा (माले) ने जताया ये शक: पंजाब और उत्तराखंड के लोगों को यह भी विचार करना चाहिए कि कहीं यह पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ध्रुवीकरण का कोई षड्यंत्र तो नहीं है, जिसका मोहरा दोनों प्रदेश के लोगों को बनाया जा रहा हो?
कांग्रेस ने दोनों प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की मांग की: उधर कांग्रेस पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश नेगी ने कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण पर कहा कि मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कुछ लोगों द्वारा इसे सांप्रदायिक रंग देकर उत्तराखंड और पंजाब के बीच का विवाद बनाने का प्रयास किया जा रहा है, इस पर रोक लगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान देश के हर कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं और प्रदेश की संस्कृति “अतिथि देवो भव” की भावना पर आधारित है. इसलिए सरकार को इस मामले में नियमों और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए. इस दौरान पत्रकार वार्ता में विपिन फरसवान, योगेंद्र सिंह, गोबिंद सजवाण, कुशाल सिंह भंडारी, आनंद सिंह पंवार, मुकुल बिष्ट, संदीप झिंकवान सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग: इसके साथ ही कांग्रेस ने पेपर लीक पर भी सरकार को घेरा. चमोली जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश डिमरी ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ देशभर में छात्रों के हित में “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम चलाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उन्होंने मांग की कि सरकारी भर्तियां समय पर निकाली जाएं, निर्धारित समय सीमा में परीक्षाएं संपन्न कराई जाएं तथा भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय माफिया तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक थराली विधानसभा क्षेत्र जीत राम टम्टा ने कहा कि शिक्षा के बाद युवाओं को रोजगार और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है. अब तक हुए कई पेपर लीक मामलों में सरकार या सरकार से जुड़े लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
