उधार की बंदूक और टीन के डिब्बों पर लगाती थीं निशाना, अब एशियन गेम्स में चैंपियन बनीं नीरू, चीन को हराकर जीता गोल्ड
मध्य प्रदेश की बेटियों ने रचा इतिहास, नीरू ढांडा भारत की पहली महिला ट्रैप चैंपियन बनीं, मनीषा ने टीम इवेंट में जीता सिल्वर. बृजेंद्र पटैरिया की रिपोर्ट.
भोपाल : मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी की प्लेयर नीरू ने एशियन गेम्स में महिला ट्रैप में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है. वहीं, भोपाल की मनीषा कीर ने भी सिल्वर मेडल जीता है. दोनों ही मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी हैं. नीरू मूल रूप से हरियाणा के जींद की रहने वाली है, लेकिन पिछले 7 सालों से उनका परिवार शिवपुरी में रह रहा है. वह भोपाल में मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी हैं. एशियन गेम्स के दस दिन पहले तक बीमारी के चलते नीरू के खेलने पर भी संशय था, लेकिन कमजोरी के बाद भी वे जापान पहुंचीं और गोल्ड पर निशाना लगाया. इसी के साथ वे भारत की पहली महिला ट्रैप चैंपियन बन गई हैं.
उधार की बंदूक से निशाना लगाना सीखा
मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी के शॉटगन कोच इंद्रजीत सिरदार ने बताया, ” नीरू बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं. उनके समर्पण भाव और मेहनत की वजह से ही यह मुकाम हासिल हुआ है. नीरू की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. निशानेबाजी की प्रेरणा उन्हें उनके रिश्ते में भाई लक्ष्य से मिली. लेकिन इस महंगे खेल के लिए उनका परिवार तैयार नहीं था, लेकिन जब ममेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जब जकार्ता में रजत पदक जीता तो उसके बाद भाई से ही बंदूक उधार लेकर निशाना लगाने की शुरुआत की.”
टीन के डिब्बों पर लगातीं थी निशाना, फाइनल में चीन को हराया
कोच इंद्रजीत ने आगे बताया, ” वह टिन के डिब्बो पर निशाना लगाती थी. 19 साल की उम्र में वे मध्यप्रदेश राज्य निशानेबाजी अकादमी में दाखिल हुईं और इसके बाद उसके खेल में तेजी से निखार आया. इसके पहले नीरू ने इटली में आईएसएसएफ शॉटगन वर्ल्ड कप गोल्ड जीता था. मंगलवार को महिला ट्रैप में बारिश और कम दृश्यता के बीच नीरू ने 30 में से 28 सटीक निशाने लगाए और चीन की सुन यूनोंग को हराकर गोल्ड जीता. नीरू ने महिला ट्रैप टीम चैम्पियनशिप में मनीषा और आशिमा के साथ सिल्वर भी जीता है.”
भोपाल की मनीषा ने जीता सिल्वर
एशियन गेम्स में भोपाल की मनीषा कीर ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है. आठ भाई बहनों में सातवें नंबर की मनीषा कीर का परिवार मछली पालन से जुड़ा है. मनीषा के पहले उनकी बड़ी बहन सोना कीर वॉटर स्पोर्ट्स में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं. मनीषा को स्पोर्ट्स में आगे बढ़ाने का काम उनकी बहन ने ही किया. सोना कीर बताती हैं कि अकादमी ने उनसे किसी एक बच्चे का नाम देने के लिए कहा था, तो उन्होंने बहन मनीषा का दिया. 2013 में अकादमी में ट्राइल के बाद उसका सिलेक्शन हो गया. सोना बताती हैं, ” मनीषा ने निशानेबाजी को चुनने के बाद उसमें खूब मेहनत की और आज नतीजा मेडल के रूप में सामने है. उधर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी है.”
