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October 13, 2026

Doon Daily News

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EPFO Salary Limit: अभी ₹15,000 ही रहेगी पीएफ की सीमा; सरकार ने सैलरी लिमिट बढ़ाने का फैसला रोका

कंपनियों पर वित्तीय बोझ रोकने के लिए सरकार ने ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला टाल दिया.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य वैधानिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के अपने प्रपोजल को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को अतिरिक्त वित्तीय दबाव से बचाना है. व्यावसायिक संगठन पहले से ही नए श्रम कानूनों के अनुपालन के कारण बढ़ते खर्चों का सामना कर रहे हैं.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया, “सकार इस समय उद्योगों पर और अधिक वित्तीय बोझ नहीं डालना चाहती है. वेतन सीमा में बढ़ोतरी निश्चित रूप से की जाएगी, लेकिन यह कदम सभी संबंधित हितधारकों के साथ उचित विचार-विमर्श और आम सहमति बनने के बाद ही उठाया जाएगा.”

कंपनियों पर वित्तीय प्रभाव
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा संहिता और वेतन संहिता के प्रावधानों की वजह से व्यवसायों की वैधानिक देनदारियों में पहले ही 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है. उदाहरण के लिए, अकेले आईटी (IT) सेक्टर ने नए लेबर कोड के प्रावधानों को लागू करने के लिए अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त निवेश किया है.

₹15,000 की मौजूदा सीमा का गणित
साल 2014 से ईपीएफओ के तहत अधिकतम वैधानिक वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह पर अपरिवर्तित है. यह सीमा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में अनिवार्य योगदान को तय करती है. वर्तमान नियमों के तहत, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ₹15,000 से अधिक है, उनके पास ईपीएफओ की इन योजनाओं से बाहर होने का विकल्प रहता है. नियोक्ताओं के लिए भी ऐसे कर्मचारियों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है.

मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान देना होता है. कर्मचारी का पूरा हिस्सा EPF में जाता है, जबकि नियोक्ता का 12% हिस्सा EPS (8.33%) और EPF (3.67%) में बंट जाता है. इस प्रकार, अभी अनिवार्य योगदान की अधिकतम सीमा ₹1,800 प्रति माह है. यदि यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो जाती है, तो कंपनियों और कर्मचारियों दोनों का अनिवार्य मासिक योगदान बढ़कर ₹3,000 हो जाएगा.

क्यों जरूरी है बदलाव?
श्रम मंत्रालय के आंतरिक मूल्यांकन के मुताबिक, वेतन सीमा में ₹10,000 की इस वृद्धि से देश के लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) से अधिक अतिरिक्त श्रमिकों को अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने लगेगा. श्रमिक संगठन लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि बड़े शहरों में अब अकुशल या मध्यम-कुशल श्रमिकों का मूल वेतन भी ₹15,000 की सीमा को पार कर चुका है, जिससे वे इस सुरक्षा कवच से बाहर हो रहे हैं. वर्तमान में ईपीएफओ का कुल कोष लगभग ₹27-28 लाख करोड़ है और इसके सक्रिय सदस्यों की संख्या करीब 8 करोड़ है.

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