हरीश रावत बोले मैंने कभी काम करवाने के लिए नहीं लिए पैसे, जिस पीए के घर पड़ा ईडी का छापा उसे ईमानदार बताया
उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने सरकार को उनके तीन साल के मुख्यमंत्रित्वकाल की जांच करने के लिए ललकारा है
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सहायक चंदन सिंह जीना के आवास पर जब से ईडी की कार्रवाई हुई है, उसके बाद से हरीश रावत लगातार कांग्रेस पार्टी की ओर से दिए गए दो दायित्वों से मुक्त होने की अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं. अब सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपने करीबी रहे चंदन सिंह जीना का समर्थन करते हुए उन्हें निष्ठावान और ईमानदार व्यक्ति बताया है.
जिसके घर पड़ा ईडी का छापा उसे हरीश रावत ने बताया ईमानदार: उन्होंने कहा कि चंदन जीना के घर पर छापा मारना दुर्भाग्यपूर्ण है. वो सरकार के छोटे पुर्जे रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब कभी भी कांग्रेस कार्यकाल के दौरान पब्लिक सर्विस कमिशन, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़ी कोई बैठक होनी होती थी, यह बैठक या तो मुख्यमंत्री स्तर या फिर सचिव स्तर पर होती थी. इनमें से ज्यादातर मामलों में हमने उनसे कहा था कि यदि कोई बात सरकार की तरफ से की जानी होगी, या फिर कोई सुझाव दिया जाना होगा, तो उसके लिए प्रमुख सचिव पर्सनल डिपार्टमेंट से संपर्क किया जाए.
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल की जांच करने की मांग की: कांग्रेस कार्यकाल के दौरान हमने स्वायत्तताओं का हमेशा सम्मान किया. हरीश रावत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को चुनौती देते हुए कहा कि वो 3 साल तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे, इसलिए मेहरबानी करके मेरे कार्यकाल को भी टटोला जाए. हरीश रावत का कहना है कि उन्हें ज्ञात है कि पहले भी दो बार कई फैसलों की फाइलों को टटोला गया था. इसलिए मैं चाहता हूं कि एक बार फिर सरकार उन फाइलों को टटोल ले और मेरे तथाकथित खजाने को ढूंढ ले.
हरीश रावत ने बताया चंदन सिंह जीना कब से हैं उनके साथ: हरीश रावत ने चंदन जीना का जिक्र करते हुए कहा है कि वो 1991 से उनके साथ हैं. उस समय में बड़े-बड़े पदों में रहा हूं, लेकिन उस समय ज्यादा स्टाफ नहीं होने की वजह से तन्ख्वाह भी खूब अच्छी दी गई. कोई भी ऐसा समय नहीं था जब चंदन सिंह जीना को तनख्वाह नहीं दी गई हो. उस दरमियान जीना 24 घंटे काम करने वाले कर्मचारी हुआ करते थे. उनके राजनीतिक जीवन में जीना के निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से काम करने के गुण हमेशा मेरे लिए सहायक रहे. लेकिन कुछ साथी ऐसे भी रहे, जिनके हाथों में कोई ताकत हो ना हो, बस फूं फां किया करते थे.
हरीश रावत ने दिल्ली आने की वजह बताते हुए जीना के घर पर हुई छापेमारी पर दी सफाई: हरीश रावत ने कहा कि जब इस समय बीमार होकर अपने उपचार के लिए दिल्ली आया, तो थोड़ा बहुत पैसा घर चलाने के लिए, स्टाफ, बिजली का बिल, डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास के किराए की रकम चुकाने के लिए कई लोगों को संदेश भिजवाया कि भाई कुछ पैसा पहुंचवा दो, ताकि मेरा घर चल सके. उन्होंने यह भी बताया कि जब वह अपना इलाज कराने के लिए गुड़गांव स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे तब पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के उनके करीबी लोगों ने आकर उन्हें उपचार के लिए खर्चा दिया.
हरीश रावत ने बताई 12 लाख रुपयों की कहानी: हरीश रावत ने कहा कि जिस दौरान वो इस अस्पताल से अपने अस्थायी आवास पर आए, तो उस दिन उनके पास 12 लाख रुपए थे. इस रकम को अकाउंट आदि में समायोजित करने में वक्त लगता है. हरीश रावत का कहना है कि लोग हमारी मदद करते हैं, क्योंकि हमने लोगों की सेवाएं की हैं. हमने लोग भी बनाए हैं. उन्होंने कहा अपने जीवन काल में उन्होंने कई वर्षों की राजनीति की और न जाने कितने चुनाव लड़े, मेरे पास कभी कुछ नहीं रहा. लेकिन इस दौरान कभी कोई कमी भी नहीं रही. लोगों ने दिल खोलकर हमारी मदद की.
हरीश रावत ने कहा मैंने कभी पैसे लेकर काम नहीं किया: हरीश रावत ने आगे कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी को राजनीतिक पद देने के लिए या फिर किसी काम को करने के बदले सर्विस चार्ज के तौर पर धनराशि नहीं ली. उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वो एक बार फिर से दोहरा रहे हैं कि उनके खिलाफ आयोग बनाकर उनके मुख्यमंत्रित्व काल की जांच करा ली जाए. अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने उत्तराखंड के लोगों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है.
