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वैन में यौन उत्पीड़न मामला: देहरादून में स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा पर सख्त हुआ प्रशासन, चालकों का होगा सत्यापन

स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल और यौन-उत्पीड़न की बढ़ती शिकायत का संज्ञान लेकर सचिव परिवहन/आयुक्त बृजेश कुमार संत ने आरटीओ को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दून शहर के पटेलनगर थाना क्षेत्र में स्कूली वैन में छात्रा के साथ चालक द्वारा यौन-उत्पीड़न की घटना के बाद सचिव परिवहन ने स्कूली वाहन चालकों व परिचालकों के सत्यापन का निर्देश दिया है। इसी के अंतर्गत आरटीओ (प्रवर्तन) शैलेश तिवारी ने आज गुरुवार को आरटीओ कार्यालय में सभी स्कून वैन संचालकों की बैठक बुलाई है। इसके बाद चालकों का सत्यापन किया जाएगा। चालकों व परिचालकों का आपराधिक इतिहास जुटाने व उनके चरित्र-सत्यापन की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। स्कूली बच्चों की परिवहन सुविधा व सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए ””दैनिक जागरण”” अकसर समाचार प्रकाशित करता रहा है। इसी दौरान मंगलवार को पटेलनगर क्षेत्र में स्कूली वैन में छात्रा से छेड़छाड़ का मामला सामने आ गया। छात्रा नेहरू कालोनी स्थित एक निजी स्कूल से घर आ रही थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना के बाद स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा फिर उछलने लगा है। घटना का संज्ञान लेकर परिवहन सचिव ने अधिकारियों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्कूली वाहनों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व परिवहन सुविधा पुख्ता करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन कराने को कहा है। निर्देश दिया कि जो भी इस गाइडलाइन की अनदेखी करेगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। सचिव परिवहन के निर्देश के बाद आरटीओ (प्रवर्तन) शैलेश तिवारी ने आज सभी स्कूल वैन संचालकों की बैठक बुलाई है। आरटीओ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने वाले वाहनों और वाहन चालकों के लिए 14 नियम बनाए गए हैं, उनका शत प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा। इसके अंतर्गत जिस चालक का एक बार भी ओवर स्पीड, शराब पीकर वाहन चलाने या खतरनाक ढंग से वाहन चलाने पर चालान हुआ हो, उसे स्कूली वाहन के संचालन से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा यदि किसी चालक का सालभर में दो बार रेड लाइट जंप करने पर चालान किया हुआ होगा तो ऐसे चालक से भी स्कूली वाहन न चलाने के लिए संचालक को कहा जाएगा। चालक के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चािए। सचिव परिवहन के आदेश पर दून शहर में प्रथम चरण में स्कूली वाहन चालकों का सत्यापन अभियान शुरू किया जाएगा। आरटीओ ने बताया कि परेड ग्राउंड में शिविर लगाकर सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी। चालक को अपने ड्राइविंग लाइसेंस, आधार-कार्ड व चरित्र सत्यापन पत्र के साथ आना होगा। चालक के नाम, पते व मोबाइल नंबर सहित पूरा विवरण विभाग के पास रहेगा। इस दौरान वाहनों के प्रपत्रों का भी सत्यापन किया जाएगा। वाहन चालकों की काउंसलिंग भी की जाएगी।

स्कूलों में भी किया जाएगा सर्वे
बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत परिवहन विभाग अब स्कूलों में जाकर भी उनकी परिवहन सुविधा का सर्वे करेगा। आरटीओ ने बताया कि यह देखा जाएगा कि बच्चे स्कूल बस, वैन, निजी कैब, आटो, रिक्शा या किन साधनों से स्कूल आ रहे। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।

स्कूली वाहन चालकों के लिए गाइड-लाइन
चालक को न्यूनतम पांच साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी।
चालक का पुलिस चरित्र-सत्यापन व आपराधिक इतिहास की जानकारी अनिवार्य।
यदि चालक का परिवहन नियम तोड़ने पर पूर्व में दो बार चालान हुआ है तो स्कूली वाहन चलाने के लिए वह अयोग्य माना जाएगा।
यदि चालक का एक बार ओवरस्पीड, खतरनाक ढंग या फिर शराब पीकर वाहन चलाने में चालान हुआ है तो ऐसा चालक प्रतिबंधित रहेगा।
बिना योग्य परिचालक के कोई स्कूल बस का संचालन नहीं करेगा।
परिचालक की योग्यता केंद्रीय मोटरयान नियमावली के अनुसार होनी अनिवार्य।
जिन वाहन का उपयोग छात्राओं को ले जाने में होता है, उसमें महिला सहायक का होना अनिवार्य।
स्कूली वाहन निर्धारित गति पर संचालित किए जाएं। स्पीड गवर्नर अनिवार्य।
निर्धारित संख्या से अधिक छात्र बैठाना प्रतिबंधित व स्कूल बैग रखने की समुचित व्यवस्था होना अनिवार्य।
सुरक्षा के लिए बंद दरवाजा अनिवार्य। खुले दरवाजे वाले वाहन प्रतिबंधित।
चालक को बच्चों के नाम, पते, ब्लड ग्रुप, रूट प्लान व रुकने के प्वाइंट की पूरी जानकारी होना अनिवार्य।
वाहन में फर्स्ट एड बाक्स व अग्नीशमन यंत्र होना अनिवार्य।

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