March 13, 2026

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उत्तराखंड: कैंसर का कारक बनने वाले कैमिकल होंगे चिहि्नत, सरकार बनाएगा नियमावली

उत्तराखंड: कैंसर का कारक बनने वाले कैमिकल होंगे चिहि्नत, सरकार बनाएगा नियमावली
प्रदेश सरकार कैंसर रोग का कारक बनने वाले पदार्थों को चिहि्नत करेगी। इसकी प्रक्रिया के लिए सरकार विस्तृत नियमावली बनाएगी। साथ ही कैंसर को बीमारी के रूप में अधिसूचित करने को गाइडलाइन बनाई जाएगी।

सदन में गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत ने तैयार खाद्य पदार्थ की निगरानी को लेकर विधायक सुमित हृदयेश के सवाल का जवाब दिया कि पहले से ही तैयार खाद्य पदार्थों अथवा इनकी पैकेजिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले कैमिकल कैंसर का कारक बन सकते हैं। सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार नियमावली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें इन कैमिकल की जांच की प्रक्रिया तय की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि कौन-कौन से कैमिकल कैंसर का कारक बनते हैं। इनकी सूची तैयार करने के साथ ही इन्हें अधिसूचित किया जाएगा और इनका इस्तेमाल रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कैंसर को बीमारी के रूप में अधिसूचित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन स्तर पर इसका कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारी के रूप में अधिसूचित करने से इस विषय को लेकर नियमावली बनाने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अपने स्तर से कैंसर को बीमारी के रूप में अधिसूचित करने को कहा है। राज्य में इस दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
हर्रावाला कैंसर अस्पताल का 99 प्रतिशत कार्य पूरा, टाटा से संचालन को चल रही बात
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 125 करोड़ की लागत से बनने वाले हर्रावाला कैंसर अस्पताल का 99 प्रतिशत कार्य हो चुका है।

इसकी गुणवत्ता जांच और हस्तांतरण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया जा चुका है। इसकी आख्या के पश्चात भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उन्होंने बताया कि राज्य के निवासियों को कैंसर का उच्च स्तरीय इलाज सुलभ कराने के उद्देश्य से इस अस्पताल को पीपीपी मोड के अलावा अन्य उपायों से भी संचालित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए टाटा कैंसर अस्पताल, मुंबई से भी वार्ता की जा रही है।
37 हजार से अधिक कार्मिकों की 68 करोड़ की चिकित्सा प्रतिपूर्ति लंबित
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए चलाई जा रही गोल्डन कार्ड योजना में कार्मिकों के इलाज पर खर्च राशि का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण 37 हजार से अधिक कार्मिकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं कर पाया है। यह राशि 68 करोड़ रुपये है।