June 13, 2026

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28 जून को धूमधाम से बर्थडे मनाने का था वादा, सबको रोता-बिलखता छोड़ गए जसपाल राणा, सूनी पड़ी अकादमी

जसपाल राणा ने अपने घरवालों और दोस्तों से भारत लौटने पर 28 जून को धूमधाम से जन्मदिन मनाने का वादा किया था

देहरादून: अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और भारतीय शूटिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच जसपाल राणा के निधन के बाद उनके परिजन, मित्र और शिष्य गहरे सदमे में हैं. जिस अकादमी में कभी खिलाड़ियों की चहल-पहल के बीच जसपाल राणा की आवाज गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है. अपने परिवार और मित्रों से जसपाल 28 जून को पड़ने वाले उनके जन्मदिन पर मिलने का वाद किए थे, लेकिन उससे पहले ही अनहोनी हो गई.

जसपाल राणा के निधन से खेल जगत में शोक: उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश के खेल जगत को बड़ा झटका देकर गए जसपाल राणा के निधन के बाद उनके घर और अकादमी में शोक का माहौल है. परिवार के सदस्य, करीबी मित्र और शिष्य लगातार उन्हें याद कर भावुक हो रहे हैं. अकादमी में पहुंचने वाला हर व्यक्ति जसपाल राणा से जुड़ी अपनी यादें साझा कर रहा है.

भतीजे को खोकर दुखी हैं चाचा: ईटीवी भारत से बातचीत में जसपाल राणा के चाचा राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि-

हाल ही में जसपाल राणा विश्व कप प्रतियोगिता के सिलसिले में जर्मनी गए थे. वहां से भारत लौटने के बाद उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी. उनके साथ मौजूद राजीव शर्मा उन्हें सीधे दिल्ली के मैक्स अस्पताल लेकर गए. जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनकी हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज होने की जानकारी दी, जिसके बाद उनका उपचार शुरू किया गया. किसी ने भी नहीं सोचा था कि देश को इतने बड़े खिलाड़ी और कोच को इतनी जल्दी खोना पड़ेगा.
-राजेंद्र सिंह राणा, जसपाल राणा के चाचा-

जसपाल राणा को पुरानी गाड़ियों का शौक था: राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि खेल के प्रति समर्पण के साथ-साथ जसपाल राणा को पुरानी गाड़ियों का भी खास शौक था. उनके पास कई विंटेज और पुरानी गाड़ियां थीं, लेकिन उन्होंने कभी किसी वाहन को बेचना पसंद नहीं किया. परिवार के मुताबिक वह अपनी पसंदीदा गाड़ियों की देखभाल खुद करते थे और उनसे उनका विशेष लगाव था.

जसपाल राणा के निधन का समाचार सुनकर रो पड़ा दोस्त: जसपाल राणा के निधन की खबर ने उनके दोस्तों को भी झकझोर कर रख दिया है. उनके एक करीबी मित्र बातचीत के दौरान भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि-

कुछ दिन पहले ही उनकी जसपाल राणा से फोन पर बात हुई थी. उस बातचीत में जसपाल राणा ने कहा था कि ’28 जून को जन्मदिन पर मिलेंगे’ हमें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी.
-जसपाल राणा के मित्र-

यह कहते-कहते वह भावुक होकर रो पड़े और बोले कि उनका दोस्त अब हमेशा के लिए बहुत दूर चला गया है.

हरियाणा से देहरादून पहुंचे शिष्यों की आंखें नम: अकादमी में पहुंचे खिलाड़ियों और शिष्यों की आंखें भी नम दिखाई दीं. हरियाणा के यमुनानगर से पहुंचे उनके एक शिष्य ने बताया कि जैसे ही उन्हें जसपाल राणा के निधन की सूचना मिली, वह तुरंत देहरादून के लिए रवाना हो गए. उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल कोच नहीं थे, बल्कि गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत थे. उनकी दी हुई सीख और अनुशासन जीवनभर याद रहेगा.
एक खिलाड़ी, कोच और अच्छे इंसान के रूप में जाने जाते थे जसपाल राणा: जसपाल राणा ने अपने खेल जीवन में देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते और बाद में एक सफल कोच के रूप में भी पहचान बनाई. उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की. यही वजह है कि उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर है.
अकादमी में सन्नाटा, लेकिन हर दिल में जसपाल राणा: आज उनकी अकादमी में सन्नाटा है, लेकिन वहां मौजूद हर खिलाड़ी और हर दीवार जसपाल राणा की उपलब्धियों और उनके संघर्षों की कहानी बयां कर रही है. 28 जून को जन्मदिन पर मिलने का वादा करने वाले जसपाल राणा भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन खेल जगत में उनका नाम और योगदान हमेशा जीवित रहेगा.

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