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उत्तराखंड में बाढ़ व जलभराव की दृष्टि से 304 स्थल संवेदनशील, सरकार की तैयारी पूरी

वर्षाकाल अब धीरे-धीरे रवानी पकड़ने लगा है। ऐसे में बाढ़ और जलभराव की चिंता भी सताने लगी है। इसे देखते हुए सरकार ने अब किसी भी आपात स्थिति से निबटने के दृष्टिगत तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। राज्य के सभी जिलों में 304 ऐसे संवेदनशील स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां बाढ़ एवं जलभराव का खतरा हो सकता है। इन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही राज्य में 113 बाढ़ सुरक्षा चौकियां प्रशासन के सहयोग से स्थापित कर दी गई हैं, ताकि नदियों में बाढ़ की स्थिति में तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके। राज्य में हर बार ही वर्षाकाल में नदियों का वेग भयभीत करता है। अब जबकि मेघ झमाझम बरस रहे हैं तो नदियाें का जल स्तर भी बढ़ने लगा है। इससे चिंता और चुनौती दोनों ही बढ़ गए हैं। इससे निबटने के लिए बाढ़ संबंधी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसी क्रम में बाढ़ सुरक्षा चौकियों के माध्यम से नदियों में बाढ़ की स्थिति बनने पर पंचायत प्रतिनिधियों को मोबाइल फोन पर जानकारी देने की व्यवस्था की गई है, ताकि संबंधित क्षेत्र में अलर्ट जारी किया जा सके।
यही नहीं 15 अक्टूबर तक के लिए सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी स्थापित कर इनकी जिम्मेदारी अधिकारियों को दे दी गई है। बाढ़ व जलभराव की दृष्टि से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून, पौड़ी, उत्तरकाशी जिलों में सबसे अधिक संवेदनशील स्थल चिहि़नत किए गए हैं।

वर्षाकाल को लेकर सिंचाई विभाग ने चाक-चौबंद की व्यवस्था : महाराज
सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने शनिवार को सुभाष रोड स्थित शिविर कार्यालय में वर्षाकाल की चुनौतियों से निबटने के लिए विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली गई हैं।
सिंचाई खंड, देहरादून के परिसर में केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो चौबीस घंटे सक्रिय रहेगा। राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नामित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ संबंधी सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए विभागीय बाढ़ नियंत्रण प्रभारी ने वाट्सएप ग्रुप बनाया है।
उन्होंने बताया कि मानसून से पहले ही सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन संवेदनशील नहरों की सफाई की जा चुकी है। राज्य की मुख्य नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन जलाशयों व बांधों पर भी नजर रखी जा रही है। बैराजों, जलाशयों के डाउनस्ट्रीम में स्थित लोगों को सूचित करने के लिए सायरन स्थापित किए गए हैं। बैठक में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष कुमार पांडेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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