May 21, 2026

Doon Daily News

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सड़क हादसे में मृत ढाबा संचालक के परिजनों को 31 लाख मुआवजा, कोर्ट ने बीमा कंपनी को भुगतान का दिया आदेश

अदालत ने दर्दनाक सड़क हादसे में मृत अफजलगढ़ निवासी ढाबा संचालक रंजीत सिंह भाटिया के परिजनों को बड़ी राहत दी है.

रुद्रपुर: काशीपुर की द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अदालत ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले अफजलगढ़ निवासी व्यवसायी रंजीत सिंह भाटिया के परिजनों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. न्यायालय ने इंश्योरेंस कंपनी को मृतक के परिवार को 31 लाख 12 हजार 611 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत अदा करने के आदेश दिए हैं. यह राशि वाद दायर किए जाने की तिथि से लागू होगी.

बिजनौर जनपद के अफजलगढ़ कस्बे के मोहल्ला गौर अली खां निवासी तथा खालसा ढाबा संचालक रंजीत सिंह भाटिया अपनी पत्नी मंजीत कौर भाटिया के साथ मोटरसाइकिल से बाजपुर स्थित डॉ. बीडी पांडे अस्पताल दवा लेने जा रहे थे. सुबह करीब साढ़े नौ बजे जब वे बाजपुर के ग्राम कनौरी के पास पहुंचे, तभी सामने से तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रहे सफेद रंग के छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी. दुर्घटना इतनी भीषण थी कि रंजीत सिंह भाटिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी मंजीत कौर गंभीर रूप से घायल हो गईं. हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया.

मृतक का पोस्टमार्टम काशीपुर के सरकारी अस्पताल में कराया गया. घटना के संबंध में मृतक के भतीजे गोविंद सिंह ने थाना बाजपुर में मुकदमा दर्ज कराया था. बाद में मृतक की पत्नी मंजीत कौर भाटिया ने अपने अधिवक्ता कैलाश चंद्र प्रजापति के माध्यम से क्षतिपूर्ति के लिए जिला जज अदालत रुद्रपुर में वाद दायर किया. सुनवाई के लिए मामला द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीतेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत में स्थानांतरित किया गया. वाद के दौरान अधिवक्ता कैलाश चंद्र प्रजापति ने न्यायालय में तर्क दिया कि मृतक रंजीत सिंह भाटिया अफजलगढ़ में खालसा ढाबे के स्वामी थे और प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रुपये की आय अर्जित करते थे.

उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटना पूरी तरह छोटा हाथी वाहन चालक की लापरवाही का परिणाम थी. मामले की विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि दुर्घटना में शामिल छोटा हाथी वाहन पर किसी अन्य वाहन की नंबर प्लेट लगाई गई थी. इस खुलासे के बाद विवेचक ने मामले में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 और 468 की बढ़ोतरी करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. वहीं बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि वाहन चालक ने मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है तथा मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है.

कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि इस प्रकरण से संबंधित एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है.दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने मृतक के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित मुआवजा राशि ब्याज समेत अदा करने का आदेश दिया. यह फैसला मृतक के परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.मामला 20 अक्टूबर 2020 का है.

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