उत्तराखंड प्रदेश की राजधानी नहीं… अब जाम की ‘राजधानी’ बना देहरादून
प्रदेश की राजधानी दून इन दिनों किसी शहर से ज्यादा एक चलता-फिरता जाम का चैंबर दिखता है। बाहर से चमकते हाईवे, कटे पहाड़, नए एक्सप्रेसवे, सब कुछ तैयार है, लेकिन शहर में कदम रखते ही हालात ऐसे होते हैं कि मानो कोई अदृश्य दीवार हो, जो कहती हो कि ‘दून में आपका स्वागत है… अब जाम में फंसकर अपनी परीक्षा दें।
’सप्ताहांत हो, छुट्टियों का दिन हो, या फिर सामान्य दिन, सड़कों पर रेंगती गाड़ियों की लाइनें, हार्न का शोर, सैलानियों की उलझन और स्थानीय लोगों की बेबसी, यह सब मिलकर दून को यातायात जाम की ‘राजधानी’ का तमगा दे रहे हैं। शहरवासी हो या सैलानी, हर किसी की जुबान पर आजकल एक ही लाइन नजर आती है ‘जाम में फंसा हूँ, थोड़ी देर बाद बात करता हूं।’
मुख्य सड़कों का हाल यह है कि जिधर देखो उधर पहिए ठहरते हुए नजर आते हैं। सड़कों का हाल ऐसा है कि पुलिस-प्रशासन चाहे जितने बयान दे, हकीकत रोजाना इन सड़कों पर साफ नजर आती है। चौड़ी दिखने वाली शहर की सबसे वीआइपी राजपुर रोड पर सुबह 10 बजे से रात नौ बजे तक स्थिति एक जैसी नजर आती है।
इस सड़क पर दिनभर गाड़ियां रेंगती है, आफिस टाइम में समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ट्रैफिक सिग्नलों से पहले लंबी कतारें और दोनों तरफ अतिक्रमण ने इसकी सांसें बंद कर रखी हैं। यही हाल कौलागढ़-बल्लीवाला–आइएसबीटी कारिडोर का भी है। यह इलाका अब ट्रैफिक का डरावना तिकोन बन चुका है। जीएमएस रोड पर पर जाम, बल्लूपुर चौक और कमला पैलेस तिराहे पर वाहन ऐसे फंसते हैं कि बिना यातायात पुलिस के निकलना मुश्किल हो जाता है।
आइएसबीटी के आसपास स्थिति और बिगड़त जाती है। अनियंत्रित आटो-विक्रम व ई-रिक्शा, अवैध पार्किंग व बसों का प्रतिबंध के बावजूद सड़क पर खड़े रहना, अब यहां की नियति बन चुका है। सहस्रधारा-रायपुर रोड व परेड ग्राउंड मार्ग के हालात भी सुबह-शाम ऐसे हैं कि किसी भी मोड़ पर 15 मिनट रुकना आम बात बन चुकी है।
