February 11, 2026

Doon Daily News

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उत्तराखंड बना देश की ‘पॉलिटिकल लैब’, इन चार कानूनों को किया गया पसंद; मोहन भागवत ने भी की तारीफ

देहरादून। भारतीय आध्यात्मिक व सांस्कृतिक चेतना से गहरे जुड़ाव रखने वाला उत्तराखंड देश के मानस पटल पर अपने प्रयोगों से राजनीतिक चेतना की नई गाथा लिख रहा है। समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी कानून के गठन, व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन के मोर्चे पर राज्य ने पहचान बनाई। साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षा कानून के रूप में ऐसी विशिष्ट पहल की है, जिसने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को लेकर प्रचलित व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया है।
इन दोनों ही कानूनों को बनाने और उनके क्रियान्वयन का प्रभावी माडल सामने आने के बाद अब यह सोचा जाने लगा है कि यह प्रयोग अन्य प्रदेशों समेत पूरे देश में किस प्रकार सफल हो सकेगा। इस पर भाजपा के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नजरें टिकी हैं। उत्तराखंड में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में इन कानूनों को जनमत की कसौटी पर भी परखा जाएगा।
समान नागरिक संहिता की स्वप्नगंगा उत्तराखंड से निकल कर अब पूरे देश को सरसब्ज करेगी, ऐसी उम्मीदों को नया संबल मिला है। मुंबई में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष में दो दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतिम चरण में विगत रविवार को संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने उत्तराखंड में लागू यूसीसी को देश की एकता के लिए अच्छा बताया।

पूरे देश में यूसीसी लागू करने के लिए व्यापक जन समर्थन जुटाने कैसे जुटाया जा सकता है, संघ प्रमुख ने इसके लिए भी उत्तराखंड का उदाहरण सामने रखा। यहां अपनाई गई प्रक्रिया मिसाल के तौर पर प्रस्तुत की। हिंदुत्व की भावभूमि को केंद्र में रखकर यह प्रयोग हुआ, लेकिन रायशुमारी सभी पंथों, समुदायों एवं वर्गों को पूरा प्रतिनिधित्व देने में कोताही नहीं होने दी गई।